बुधवार, 9 अक्टूबर 2013

पथरी (किडनी / गल ब्लैडर) का आयुर्वेदिक उपचार :-



एक पौधा होता है जिसे हिंदी मे पत्थरचट्टा, पाषाणभेद, पणफुट्टी, भष्मपथरी कहते है, फोटो देखे निचे ... इसका वैज्ञानिक नाम है "bryophyllum pinnatum" !

सेवन की विधि : दो पत्ते तोड़े, उसको अच्छी तरह पानी से धोने के बाद सुबह सुबह खाली पेट चबा कर खाले, हलके गरम पानी के साथ !

एक हफ्ते के अन्दर पथरी विघटित हो कर शरीर से निकल जाएगी !

तुलसी के फायदे...

तुलसी के फायदे...
1. तुलसी रस से बुखार उतर जाता है। इसे पानी में मिलाकर हर दो-तीन घंटे में पीने से बुखार कम हो जाता है।

2. कई आयुर्वेदिक कफ सिरप में तुलसी का इस्तेमाल अनिवार्य है।यह टी.बी,ब्रोंकाइटिस और दमा जैसे रोंगो के लिए भी फायदेमंद है।

3. जुकाम में इसके सादे पत्ते खाने से भी फायदा होता है।

4. सांप या बिच्छु के काटने पर इसकी पत्तियों का रस,फूल और जडे विष नाशक का काम करती हैं।

5. तुलसी के तेल में विटामिन सी,कै5रोटीन,कैल्शियम और फोस्फोरस प्रचुर मात्रा में होते हैं।

6. साथ ही इसमें एंटीबैक्टेरियल,एंटीफंगल और एंटीवायरल गुण भी होते हैं।

7. यह मधुमेह के रोगियों के लिए भी फायदेमंद है।साथ ही यह पाचन क्रिया को भी मज़बूत करती हैं।

8. तुलसी का तेल एंटी मलेरियल दवाई के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। एंटीबॉडी होने की वजह से यह हमारी इम्यूनिटी भी बढा देती है।

9. तुलसी के प्रयोग से हम स्वास्थय और सुंदरता दोनों को ही ठीक रख सकते हैं।


तुलसी में गजब की रोगनाशक शक्ति है। विशेषकर सर्दी, खांसी व बुखार में यह अचूक दवा का काम करती है। इसीलिए भारतीय आयुर्वेद के सबसे प्रमुख ग्रंथ चरक संहिता में कहा गया है।

- तुलसी हिचकी, खांसी,जहर का प्रभाव व पसली का दर्द मिटाने वाली है। इससे पित्त की वृद्धि और दूषित वायु खत्म होती है। यह दूर्गंध भी दूर करती है।

- तुलसी कड़वे व तीखे स्वाद वाली दिल के लिए लाभकारी, त्वचा रोगों में फायदेमंद, पाचन शक्ति बढ़ाने वाली और मूत्र से संबंधित बीमारियों को मिटाने वाली है। यह कफ और वात से संबंधित बीमारियों को भी ठीक करती है।

- तुलसी कड़वे व तीखे स्वाद वाली कफ, खांसी, हिचकी, उल्टी, कृमि, दुर्गंध, हर तरह के दर्द, कोढ़ और आंखों की बीमारी में लाभकारी है। तुलसी को भगवान के प्रसाद में रखकर ग्रहण करने की भी परंपरा है, ताकि यह अपने प्राकृतिक स्वरूप में ही शरीर के अंदर पहुंचे और शरीर में किसी तरह की आंतरिक समस्या पैदा हो रही हो तो उसे खत्म कर दे। शरीर में किसी भी तरह के दूषित तत्व के एकत्र हो जाने पर तुलसी सबसे बेहतरीन दवा के रूप में काम करती है। सबसे बड़ा फायदा ये कि इसे खाने से कोई रिएक्शन नहीं होता है।

तुलसी की मुख्य जातियां- तुलसी की मुख्यत: दो प्रजातियां अधिकांश घरों में लगाई जाती हैं। इन्हें रामा और श्यामा कहा जाता है।

- रामा के पत्तों का रंग हल्का होता है। इसलिए इसे गौरी कहा जाता है।

- श्यामा तुलसी के पत्तों का रंग काला होता है। इसमें कफनाशक गुण होते हैं। यही कारण है कि इसे दवा के रूप में अधिक उपयोग में लाया जाता है।

- तुलसी की एक जाति वन तुलसी भी होती है। इसमें जबरदस्त जहरनाशक प्रभाव पाया जाता है, लेकिन इसे घरों में बहुत कम लगाया जाता है। आंखों के रोग, कोढ़ और प्रसव में परेशानी जैसी समस्याओं में यह रामबाण दवा है।

- एक अन्य जाति मरूवक है, जो कम ही पाई जाती है। राजमार्तण्ड ग्रंथ के अनुसार किसी भी तरह का घाव हो जाने पर इसका रस बेहतरीन दवा की तरह काम करता है।

मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारी - मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारी, जैसे मलेरिया में तुलसी एक कारगर औषधि है। तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा बनाकर पीने से मलेरिया जल्दी ठीक हो जाता है। जुकाम के कारण आने वाले बुखार में भी तुलसी के पत्तों के रस का सेवन करना चाहिए। इससे बुखार में आराम मिलता है। शरीर टूट रहा हो या जब लग रहा हो कि बुखार आने वाला है तो पुदीने का रस और तुलसी का रस बराबर मात्रा में मिलाकर थोड़ा गुड़ डालकर सेवन करें, आराम मिलेगा।

- साधारण खांसी में तुलसी के पत्तों और अडूसा के पत्तों को बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से बहुत जल्दी लाभ होता है।

- तुलसी व अदरक का रस बराबर मात्रा में मिलाकर लेने से खांसी में बहुत जल्दी आराम मिलता है।

- तुलसी के रस में मुलहटी व थोड़ा-सा शहद मिलाकर लेने से खांसी की परेशानी दूर हो जाती है।

- चार-पांच लौंग भूनकर तुलसी के पत्तों के रस में मिलाकर लेने से खांसी में तुरंत लाभ होता है।

- शिवलिंगी के बीजों को तुलसी और गुड़ के साथ पीसकर नि:संतान महिला को खिलाया जाए तो जल्द ही संतान सुख की प्राप्ति होती है।

- किडनी की पथरी में तुलसी की पत्तियों को उबालकर बनाया गया काढ़ा शहद के साथ नियमित 6 माह सेवन करने से पथरी मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाती है।
- फ्लू रोग में तुलसी के पत्तों का काढ़ा, सेंधा नमक मिलाकर पीने से लाभ होता है।

- तुलसी थकान मिटाने वाली एक औषधि है। बहुत थकान होने पर तुलसी की पत्तियों और मंजरी के सेवन से थकान दूर हो जाती है।

- प्रतिदिन 4- 5 बार तुलसी की 6-8 पत्तियों को चबाने से कुछ ही दिनों में माइग्रेन की समस्या में आराम मिलने लगता है।

- तुलसी के रस में थाइमोल तत्व पाया जाता है। इससे त्वचा के रोगों में लाभ होता है।

- तुलसी के पत्तों को त्वचा पर रगड़ दिया जाए तो त्वचा पर किसी भी तरह के संक्रमण में आराम मिलता है।

- तुलसी के पत्तों को तांबे के पानी से भरे बर्तन में डालें। कम से कम एक-सवा घंटे पत्तों को पानी में रखा रहने दें। यह पानी पीने से कई बीमारियां पास नहीं आतीं।

- दिल की बीमारी में यह अमृत है। यह खून में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करती है। दिल की बीमारी से ग्रस्त लोगों को तुलसी के रस का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए।


सावधानी :

फायदे जानने के बाद तुलसी के सेवन में अति कर देना नुकसानदायक साबित होगा। क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है इसलिए दिन भर में 10-12 पत्तों का ही सेवन करना चाहिए। खासतौर पर महिलाओं के लिए भले ही तुलसी एक वरदान की तरह है लेकिन फिर भी एक दिन में पांच तुलसी के पत्ते पर्याप्त हैं। हां, इसका सेवन छाछ या दही के साथ करने से इसका प्रभाव संतुलित हो जाता है। हालांकि यह आर्थराइटिस, एलर्जी, मैलिग्नोमा, मधुमेह, वायरल आदि रोगों में फायदा पहुंचाती है। लेकिन गर्भावस्था के दौरान इसके सेवन का ध्यान रखना जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान अगर दर्द ज्यादा होता है तब तुलसी के काढे से फायदा पहुंच सकता है। इसमे तुलसी के पत्तो को रात भर पानी मे भिगो दें और सुबह उसे क्रश करके चीनी के साथ खाएं ब्रेस्ट- फीडिंग के दौरान भी तुलसी का काढा फायदेमंद होता है। इसके लिए बीस ग्राम तुलसी का रस और मकई के पत्तों रस मिलाएं, इसमें दस ग्राम अश्वगंधा रस और दस ग्राम शहद मिला कर खाएं। तुलसी बच्चेदानी को स्वास्थ रखने के लिए भी सहायक है। हां, एक बात ध्यान रहे कि आपके स्वास्थ पर तुलसी के अच्छे और बुरे दोनों प्रभाव पड सकते हैं इसलिए महिलाओं के लिए हो या बच्चों के लिए, बिना आयुर्वेदाचार्य से परामर्श लिए इसका इस्तेमाल न करे।

ध्यान रहे तुलसी पूजनीय हें , इसका अपमान / अनादर न करें !


सोमवार, 7 अक्टूबर 2013

उच्च रक्तचाप - कुछ घरेलू प्रयोग

उच्च रक्तचाप - कुछ घरेलू प्रयोग 
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-पांच बेल पत्र पत्थर पर पीस कर उसकी चटनी बनायें अब इस चटनी को एक ग्लास पानी में डाल कर खूब गरम कर लें , जब पानी आधा रह जाये , तब उसको ठंडा करके पी लें। ये सबसे जल्दी उच्च रक्तचाप को ठीक करता है |

-आधा चम्मच मेथी दाना रात को एक ग्लास गरम पानी में भिगो दीजिये, रात भर पानी में पड़ा रहने दीजिये और सुबह उठ कर पानी 
को पी लीजिये और मेथी दाने को चबा के खा लीजिये । ये बहुत जल्दी आपकी हाई BP कम कर देगा, डेढ़ से दो महीने में सामान्य कर देगा ।

-दालचीनी जो मसाले के रूप में उपयोग होता है को पीस कर पावडर बनाकर रख लें, आधा चम्मच रोज सुबह खाली पेट गरम पानी के 
साथ लेने से रक्तचाप सामान्य हो जाता है |

-एक कप लौकी रस + पांच धनिया पत्ता + पांच पुदीना पत्ता + पांच तुलसी पत्र + तीन- चार काली मिर्च पीस कर मिला ले, रोज सुबह 
खाली पेट नाश्ते के आधा घंटे पहले पीने से समस्त ह्रदय रोगों में लाभ मिलता है |

सोमवार, 30 सितंबर 2013

अजीनोमोटो:यह धीमा जहर है।

                                                     ::अजीनोमोटो::

सफेद रंग का चमकीला सा दिखने वाला मोनोसोडि़यम ग्लूटामेट यानी अजीनोमोटो, एक सोडियम साल्ट है। अगर आप चाइनीज़ डिश के दीवाने हैं तो यह आपको उसमें जरूर मिल जाएगा क्योंकि यह एक मसाले
के रूप में उनमें इस्तमाल किया जाता है। शायद ही आपको पता हो कि यह खाने का स्वाद बढ़ाने वाला मसाला वास्तव में जहर यह धीमा खाने का स्वाद नहीं बढ़ाता बल्कि हमारी स्वाद ग्रन्थियों के कार्य को दबा देता है जिससे हमें खाने के बुरे स्वाद का पता नहीं लगता। मूलतः इस का प्रयोग खाद्य की घटिया गुणवत्ता को छिपाने के लिए किया जाता है। यह सेहत के लिए भी बहुत खतरनाक होता है।

जान लें कि कैसे-
* सिर दर्द, पसीना आना और चक्कर आने जैसी खतरनाक बीमारी आपको अजीनोमोटो से हो सकती है। अगर आप इसके आदि हो चुके हैं और खाने में इसको बहुत प्रयोग करते हैं तो यह आपके दिमाग को भी नुकसान कर सकता है।
* इसको खाने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। चेहरे की सूजन और त्वचा में खिंचावमहसूस होना इसके कुछ साइड इफेक्ट हो सकते हैं।
* इसका ज्यादा प्रयोग से धीरे धीरे सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत और आलस भी पैदा कर सकता है। इससे सर्दी-जुखाम और थकान भी महसूस होती है। इसमें पाये जाने वाले एसिड सामग्रियों की वजह से यह पेट और गले में जलन भी पैदा कर सकता है।
* पेट के निचले भाग में दर्द, उल्टी आना और डायरिया इसके आम दुष्प्रभावों में से एक हैं।
* अजीनोमोटो आपके पैरों की मासपेशियों और घुटनों में दर्द पैदा कर सकता है। यह हड्डियों को कमज़ोर और शरीर द्वारा जितना भी कैल्शिम लिया गया हो, उसे कम कर देता है।
* उच्च रक्तचाप की समस्या से घिरे लोगों को यह बिल्कुल नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ और घट जाता है।
* व्यक्तियों को इससे माइग्रेन होने की समस्या भी हो सकती है। आपके सिर में दर्द पैदा हो रहा है तो उसे तुरंत ही खाना बंद कर दें।
* अजीनोमोटो की उत्पादन प्रक्रिया भी विवादास्पद है : कहा जाता है कि इसका उत्पादन जानवरों के शरीर से प्राप्त सामग्री से भी किया जा सकता है।

*अजीनोमोटो बच्चों के लिए बहुत हानिकारक है। इसके कारण स्कूल
जाने वाले ज्यादातर बच्चे सिरदर्द के शिकार हो रहे हैं। भोजन में एमएसजी का इस्तेमाल या प्रतिदिन एमएसजी युक्त जंकफूड और प्रोसेस्ड फूड का असर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है। कई शोधों में यह बात साबित हो चुकी है कि एमएसजी युक्त डाइट बच्चों में मोटापे की समस्या का एक कारण है। इसके अलावा यह बच्चों को भोजन के प्रति अंतिसंवेदनशील बना सकता है। मसलन, एमएसजी युक्त भोजन अधिक खाने के बाद हो सकता है कि बच्चे को किसी दूसरी डाइट से एलर्जी हो जाए। इसके अलावा, यह बच्चों के व्यवहार से संबंधित समस्याओं का भी एक कारण है। छिपा हो सकता है अजीनोमोटो अब पूरी दुनिया में मैगी नूडल बच्चे बड़े सभी चाव से खाते हैं, इस मैगी में जो राज की बात है वो है Hydrolyzed groundnut protein और स्वाद वर्धक 635 Disodium ribonucleotides यह कम्पनी यह दावा करती है कि इसमें अजीनोमोटो यानि MSG नहीं डाला गया है। जबकि Hydrolyzed groundnut protein पकने के बाद अजीनोमोटो यानि MSG में बदल जाता है और Disodium ribonucleotides इसमें मदद करता है।

मंगलवार, 24 सितंबर 2013

डेंगू ज्वर परिचय :लक्षण, लगातार, डेंगू ज्वर का विभिन्न औषधियों से उपचार


डेंगू ज्वर परिचय :

Photo: डेंगू ज्वर परिचय :

डेंगू बुखार में रोगी के पूरे शरीर की हडि्डयों में ऐसा दर्द
होता है जैसे कि सभी हडि्डयां टूट गई हों। डेंगू बुखार एक
संक्रामक बुखार हैं जो क्यूलिक्स नामक मच्छरों के
द्वारा एक रोगी से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश
करके रोग को पहुंचाता है। इस तरह का बुखार होने पर रोगी को भूख नहीं लगती है, रोगी को हर समय बुखार 103 से 105 डिग्री तक बना रहता है। एक सप्ताह तक
रोगी को पसीना, दस्त, नकसीर (नाक से खून आना) आने
लगती है। अगर यह बुखार ज्याद
ा बढ़ जाता है तो रोगी के कान में दर्द और सूजन
तथा फेफड़ों में सूजन आ जाती है। 

लक्षण :
डेंगू बुखार होने पर रोगी को अचानक बिना खांसी व
जुकाम के तेज बुखार हो जाता है, रोगी के शरीर में तेज दर्द
होकर हडि्डयों में पीड़ा होती हैं। रोगी के सिर के अगले
हिस्से में तेज दर्द होता है, आंख के पिछले भाग में दर्द
होता है, रोगी की मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होता है, रोगी को भूख कम लगती है और उसके मुंह का स्वाद खराब
हो जाता है, रोगी की छाती पर खसरे के जैसे दाने निकल
आते हैं, इसके अलावा जी मिचलाना, उल्टी होना,
रोशनी से चिड़चिड़ाहट होना आदि लक्षण पाए जाते
हैं। परन्तु कभी-कभी डेंगू बुखार में खून भी आने लगता है,
जिसे हीमोरैजिक रक्तस्राव कहते हैं। हीमोरैजिक रक्तस्राव के समय के लक्षण कुछ इस प्रकार हैं

- लगातार
पेट में तेज दर्द रहना, त्वचा ठंड़ी, पीली व
चिपचिपी होना, रोगी के चेहरे और हाथ-पैरों पर लाल
दाने हो जाते हैं। हीमोरैजिक डेंगू होने पर शरीर के
अन्दरूनी अंगों से खून आने लगता है। नाक, मुंह व मल के
रास्ते खून आता है जिससे कई बार रोगी बेहोश हो जाता है। खून के बिना या खून के साथ बार-बार उल्टी,
नींद के साथ व्याकुलता, लगातार चिल्लाना, अधिक
प्यास का लगना या मुंह का बार-बार सूखना आदि लक्षण
पैदा हो जाते हैं। हीमोरैजिक डेंगू अधिक खतरनाक
होता हैं और डेंगू बुखार साधारण बुखार से काफी मिलता-
जुलता होता है। 

डेंगू ज्वर का विभिन्न औषधियों से उपचार: 

1 सर्पगंधा:-सर्पगंधा के कन्द (फल) का चूर्ण,
कालीमिर्च, डिकामाली घोड़बच और चिरायता के
चूर्ण को एकसाथ मिलाने से बनी मिश्रित औषधि में
से 1 से 2 ग्राम को सुबह और शाम लेने से डेंगू के बुखार में
लाभ मिलता है। 

2 अंकोल:-*3 ग्राम अंकोल की जड़ के चूर्ण को 2 ग्राम
मीठी बच या शुंठी के चूर्ण के साथ चावल के माण्ड में
पकाकर सेवन करने से डेंगू के बुखार में लाभ होता है। यह फ्लू
में भी लाभकारी है।
*लगभग एक ग्राम से कम की मात्रा में अंकोल की जड़
की छाल को घोड़बच या सोंठ के साथ चावल के माण्ड में उबालकर रोजाना सेवन करने से डेंगू ज्वर में लाभ
मिलता है। इसके पत्तों को पीसकर जरा-सा गर्म करके
दर्द वाले अंग पर बांधने से भी लाभ होता है। " 

3 यवाक्षार:-लगभग एक ग्राम से कम की मात्रा में
यवाक्षार को नीम के पत्ते के रस या नीम के काढ़े के साथ
सुबह और शाम लेने से पसीना आने से होने वाला बुखार कम
होता है और शरीर का दर्द मिटता जाता है। 

4 ईश्वरमूल:-लगभग आधा ग्राम से 2 ग्राम की मात्रा में
ईश्वर मूल (रूद्रजटा) का चूर्ण सुबह और शाम सेवन करने से
डेंगू ज्वर दूर हो जाता है। 5 चंदन:-5 से 10 बूंद चंदन के तेल को बतासे पर डालकर
सुबह और शाम लेकर ऊपर से पानी से पीने से बुखार कम
हो जाता है। 

6 कर्पूरासव:-कर्पूरासव 5 से 10 बूंद बतासे पर डालकर
सुबह और शाम लेने से खून की नसें फैलती हैं, पसीना आकर
बुखार, दाह (जलन) और बेचैनी कम होते जाते हैं। 

7 साधारण उपचार:-डेंगू बुखार तेज होने पर रोगी के माथे पर
ठंड़े पानी की पट्टियां रखी जा सकती हैं। हीमोरैजिक
डेंगू होने पर रोगी के खून में प्लेटीनेट्स की संख्या बढ़ाने
के लिए अतिरिक्त मात्रा देने
की आवश्यकता होती है। ध्यान देने वाली बात यह है
कि हीमोरैजिक डेंगू होने पर रोगी को दर्द दूर करने वाली दवा नहीं देनी चाहिए क्योंकि कई बार इन दर्द
निवारक दवाओं से रोगी में खून के बहने का डर
बना रहता है। इस दौरान शरीर में पानी की मात्रा और
रक्तचाप को नियंत्रित करना भी जरूरी होता है। 

8 गिलोय बेल: -गिलोय बेल की डंडी ले ! डंडी के छोटे
टुकड़े करे !

2 गिलास पानी मे उबाले ! जब पानी आधा रह
जाये !
ठंडा होने पर रोगी को पिलाये !
मात्र 45 मिनट बाद cell बढ़ने शुरू हो जाएँगे !!
इससे अच्छा और सस्ता कोई इलाज नहीं डेंगू बुखार का"
डेंगू बुखार में रोगी के पूरे शरीर की हडि्डयों में ऐसा दर्द होता है जैसे कि सभी हडि्डयां टूट गई हों। डेंगू बुखार एक संक्रामक बुखार हैं जो क्यूलिक्स नामक मच्छरों के द्वारा एक रोगी से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करके रोग को पहुंचाता है। इस तरह का बुखार होने पर रोगी को भूख नहीं लगती है, रोगी को हर समय बुखार  103 से 105 डिग्री तक बना रहता है। एक सप्ताह तक रोगी को पसीना, दस्त, नकसीर (नाक से खून आना)  आने लगती है। अगर यह बुखार ज्याद ा बढ़ जाता है तो रोगी के कान में दर्द और सूजन तथा फेफड़ों में सूजन आ जाती है। 

लक्षण :
डेंगू बुखार होने पर रोगी को अचानक बिना खांसी व जुकाम के तेज बुखार हो जाता है, रोगी के शरीर में तेज दर्द होकर हडि्डयों में पीड़ा होती हैं। रोगी के सिर के अगले हिस्से में तेज दर्द होता है, आंख के पिछले भाग में दर्द होता है, रोगी की मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होता है, रोगी को भूख कम लगती है और उसके मुंह का स्वाद खराब हो जाता है, रोगी की छाती पर खसरे के जैसे दाने निकल आते हैं, इसके अलावा जी मिचलाना, उल्टी होना, रोशनी से चिड़चिड़ाहट होना आदि लक्षण पाए जाते हैं। परन्तु कभी-कभी डेंगू बुखार में खून भी आने लगता है, जिसे हीमोरैजिक रक्तस्राव कहते हैं। हीमोरैजिक रक्तस्राव के समय के लक्षण कुछ इस प्रकार हैं

- लगातार
पेट में तेज दर्द रहना, त्वचा ठंड़ी, पीली व चिपचिपी होना, रोगी के चेहरे और हाथ-पैरों पर लाल
दाने हो जाते हैं। हीमोरैजिक डेंगू होने पर शरीर के अन्दरूनी अंगों से खून आने लगता है। नाक, मुंह व मल के
रास्ते खून आता है जिससे कई बार रोगी बेहोश हो जाता है। खून के बिना या खून के साथ बार-बार उल्टी,
नींद के साथ व्याकुलता, लगातार चिल्लाना, अधिक प्यास का लगना या मुंह का बार-बार सूखना आदि लक्षण
पैदा हो जाते हैं। हीमोरैजिक डेंगू अधिक खतरनाक होता हैं और डेंगू बुखार साधारण बुखार से काफी मिलता-
जुलता होता है।

डेंगू ज्वर का विभिन्न औषधियों से उपचार: 

1 सर्पगंधा:-सर्पगंधा के कन्द (फल) का चूर्ण, कालीमिर्च, डिकामाली घोड़बच और चिरायता के चूर्ण को एकसाथ मिलाने से बनी मिश्रित औषधि में से 1 से 2 ग्राम को सुबह और शाम लेने से डेंगू के बुखार में लाभ मिलता है।

2 अंकोल:-*3 ग्राम अंकोल की जड़ के चूर्ण को 2 ग्राम मीठी बच या शुंठी के चूर्ण के साथ चावल के माण्ड में पकाकर सेवन करने से डेंगू के बुखार में लाभ होता है। यह फ्लू में भी लाभकारी है। *लगभग एक ग्राम से कम की मात्रा में अंकोल की जड़ की छाल को घोड़बच या सोंठ के साथ चावल के माण्ड में उबालकर रोजाना सेवन करने से डेंगू ज्वर में लाभ मिलता है। इसके पत्तों को पीसकर जरा-सा गर्म करके दर्द वाले अंग पर बांधने से भी लाभ होता है। "

3 यवाक्षार:-लगभग एक ग्राम से कम की मात्रा में यवाक्षार को नीम के पत्ते के रस या नीम के काढ़े के साथ सुबह और शाम लेने से पसीना आने से होने वाला बुखार कम होता है और शरीर का दर्द मिटता जाता है।

4 ईश्वरमूल:-लगभग आधा ग्राम से 2 ग्राम की मात्रा में ईश्वर मूल (रूद्रजटा) का चूर्ण सुबह और शाम सेवन करने से डेंगू ज्वर दूर हो जाता है। 5 चंदन:-5 से 10 बूंद चंदन के तेल को बतासे पर डालकर सुबह और शाम लेकर ऊपर से पानी से पीने से बुखार कम
हो जाता है।

6 कर्पूरासव:-कर्पूरासव 5 से 10 बूंद बतासे पर डालकर सुबह और शाम लेने से खून की नसें फैलती हैं, पसीना आकर बुखार, दाह (जलन) और बेचैनी कम होते जाते हैं।

7 साधारण उपचार:-डेंगू बुखार तेज होने पर रोगी के माथे पर ठंड़े पानी की पट्टियां रखी जा सकती हैं। हीमोरैजिक डेंगू होने पर रोगी के खून में प्लेटीनेट्स की संख्या बढ़ाने के लिए अतिरिक्त मात्रा देने की आवश्यकता होती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि हीमोरैजिक डेंगू होने पर रोगी को दर्द दूर करने वाली दवा नहीं देनी चाहिए क्योंकि कई बार इन दर्द निवारक दवाओं से रोगी में खून के बहने का डर
बना रहता है। इस दौरान शरीर में पानी की मात्रा और रक्तचाप को नियंत्रित करना भी जरूरी होता है। 

8 गिलोय बेल: -गिलोय बेल की डंडी ले ! डंडी के छोटे टुकड़े करे !

2 गिलास पानी मे उबाले ! जब पानी आधा रह जाये !
ठंडा होने पर रोगी को पिलाये ! मात्र 45 मिनट बाद cell बढ़ने शुरू हो जाएँगे !!
इससे अच्छा और सस्ता कोई इलाज नहीं डेंगू बुखार का"

रविवार, 14 जुलाई 2013

आयुर्वेदिक दोहे

1. जहाँ कहीं भी आपको, काँटा कोइ लग जाय।
 दूधी पीस लगाइये, काँटा बाहर आय।।

2. मिश्री कत्था तनिक सा, चूसें मुँह में डाल।

 मुँह में छाले हों अगर, दूर होंय तत्काल।।

3. पौदीना औ इलायची, लीजै दो-दो ग्राम।

 खायें उसे उबाल कर, उल्टी से आराम।।

4. छिलका लेंय इलायची, दो या तीन गिराम।

 सिर दर्द मुँह सूजना, लगा होय आराम।।

5. अण्डी पत्ता वृंत पर, चुना तनिक मिलाय।

 बार-बार तिल पर घिसे, तिल बाहर आ जाय।।

6. गाजर का रस पीजिये, आवश्कतानुसार।

 सभी जगह उपलब्ध यह, दूर करे अतिसार।।

7. खट्टा दामिड़ रस, दही,गाजर शाक पकाय।

 दूर करेगा अर्श को, जो भी इसको खाय।।

8. रस अनार की कली का, नाकबूँद दो डाल।

 खून बहे जो नाक से, बंद होय तत्काल।।

9. भून मुनक्का शुद्ध घी, सैंधा नमक मिलाय।

 चक्कर आना बंद हों, जो भी इसको खाय।।

10. मूली की शाखों का रस,ले निकाल सौ ग्राम। 

तीन बार दिन में पियें, पथरी से आराम।।

11. दो चम्मच रस प्याज की,मिश्री सँग पी जाय।

 पथरी केवल बीस दिन, में गल बाहर जाय।।

12. आधा कप अंगूर रस, केसर जरा मिलाय।

 पथरी से आराम हो, रोगी प्रतिदिन खाय।।

13. सदा करेला रस पिये,सुबहा हो औ शाम

। दो चम्मच की मात्रा, पथरी से आराम।।

14. एक डेढ़ अनुपात कप, पालक रस चौलाइ।

 चीनी सँग लें बीस दिन,पथरी दे न दिखाइ।।

15. खीरे का रस लीजिये,कुछ दिन तीस ग्राम।

 लगातार सेवन करें, पथरी से आराम।।

16. बैगन भुर्ता बीज बिन,पन्द्रह दिन गर खाय।

 गल-गल करके आपकी,पथरी बाहर आय।।

17. लेकर कुलथी दाल को,पतली मगर बनाय। 

इसको नियमित खाय तो,पथरी बाहर आय।।

18. दामिड़ (अनार) छिलका सुखाकर, पीसे चूर बनाय।

 सुबह-शाम जल डालकम, पी मुँह बदबू जाय।।

19. चूना घी और शहद को, ले सम भाग मिलाय।

 बिच्छू को विष दूर हो, इसको यदि लगाय।।

20. गरम नीर को कीजिये, उसमें शहद मिलाय।

 तीन बार दिन लीजिये, तो जुकाम मिट जाय।।

21. अदरक रस मधु (शहद) भाग सम, करें अगर उपयोग।

 दूर आपसे होयगा, कफ औ खाँसी रोग।।

22. ताजे तुलसी-पत्र का, पीजे रस दस ग्राम। 

पेट दर्द से पायँगे, कुछ पल का आराम।।

23. बहुत सहज उपचार है, यदि आग जल जाय।

 मींगी पीस कपास की, फौरन जले लगाय।।

24. रुई जलाकर भस्म कर, वहाँ करें भुरकाव।

 जल्दी ही आराम हो, होय जहाँ पर घाव।।

25. नीम-पत्र के चूर्ण मैं, अजवायन इक ग्राम।

 गुण संग पीजै पेट के, कीड़ों से आराम।।

26. दो-दो चम्मच शहद औ, रस ले नीम का पात।

 रोग पीलिया दूर हो, उठे पिये जो प्रात।।

27. मिश्री के संग पीजिये, रस ये पत्ते नीम

। पेंचिश के ये रोग में, काम न कोई हकीम।।

28. हरड बहेडा आँवला चौथी नीम गिलोय, 

पंचम जीरा डालकर सुमिरन काया होय॥

29. सावन में गुड खावै, सो मौहर बराबर पावै॥

शनिवार, 6 जुलाई 2013

तुलसी

बारिश के मौसम में रोजाना तुलसी के 5 पत्ते खाने के अनोखे फायदेतुलसी एक ऐसा पौधा है जो कई तरह के अद्भुत औषधिय गुणों से भरपूर है। हिन्दू धर्म में तुलसी को इसके अनगिनत औषधीय गुणों के कारण पूज्य माना गया है। यही कारण है कि हिन्दू धर्म में तुलसी से जुड़ी अनेक धार्मिक मान्यताएं है और हिन्दू धर्म में तुलसी को घर में लगाना अनिवार्य माना गया है। आज हम बात कर रहे हैं तुलसी के कुछ ऐसे ही गुणों के बारे में....
- मासिक धर्म के दौरान कमर में दर्द हो रहा हो तो एक चम्मच तुलसी का रस लें। इसके अलावा तुलसी के पत्ते चबाने से भी मासिक धर्म नियमित रहता है।
- बारिश के मौसम में रोजाना तुलसी के पांच पत्ते खाने से मौसमी बुखार व जुकाम जैसी समस्याएं दूर रहती है। तुलसी की कुछ पत्तियों को चबाने से मुंह का संक्रमण दूर हो जाता है। मुंह के छाले दूर होते हैं व दांत भी स्वस्थ रहते हैं।
- सुबह पानी के साथ तुलसी की पत्तियां निगलने से कई प्रकार की बीमारियां व संक्रामक रोग नहीं होते हैं। दाद, खुजली और त्वचा की अन्य समस्याओं में रोजाना तुलसी खाने व तुलसी के अर्क को प्रभावित जगह पर लगाने से कुछ ही दिनों में रोग दूर हो जाता है।
- तुलसी की जड़ का काढ़ा ज्वर (बुखार) नाशक होता है। तुलसी, अदरक और मुलैठी को घोटकर शहद के साथ लेने से सर्दी के बुखार में आराम होता है।